पिता की आख़िरी सीख 💔

पिता की आख़िरी सीख 💔

एक छोटा-सा परिवार था—पिता और उनका बेटा। पिता दिन-रात मेहनत करके बेटे की हर जरूरत पूरी करते थे। खुद पुराने कपड़े पहनते, लेकिन बेटे के लिए हमेशा नया खरीदते।

बेटा बड़ा हुआ और नौकरी के लिए शहर चला गया। धीरे-धीरे काम में इतना व्यस्त हो गया कि पिता के फोन भी कम उठाने लगा।

एक दिन पिता ने फोन करके कहा,
“बेटा, बहुत दिन हो गए… घर आ जा, तुझसे मिलने का मन है।”

बेटे ने कहा,
“पापा, अभी बहुत काम है। अगले महीने जरूर आऊँगा।”

अगला महीना आया… लेकिन बेटा नहीं आया।

एक सुबह उसके पास फोन आया—
“तुम्हारे पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे।”

बेटा दौड़कर घर पहुँचा। पिता के कमरे में उसकी बचपन की तस्वीरें रखी थीं। मेज पर एक छोटी-सी चिट्ठी थी—

“बेटा, मुझे तुमसे कभी कुछ नहीं चाहिए था…
बस कभी-कभी तुम्हारा साथ चाहिए था।”

चिट्ठी पढ़ते ही बेटा फूट-फूटकर रोने लगा।

उस दिन उसे समझ आया कि पैसा कमाने के लिए उसने बहुत समय दिया, लेकिन जिस इंसान ने उसे जिंदगी दी, उसके लिए समय नहीं निकाल पाया।

सीख:
पिता की कद्र उनके साथ रहते हुए करो, क्योंकि उनके जाने के बाद पछतावा तो रहता है… लेकिन उन्हें वापस बुलाने का कोई रास्ता नहीं होता। 💔🥀

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